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महाराजगंज

नगर अध्यक्ष द्वारा दिए गए नोटिस को अधिशासी अधिकारी बताती है प्रेम पत्र, उकसाने पर पंचायत कर्मियों ने दिया धरना, सड़कों पर बिखेरा कूड़ा

पंचायत कर्मियों की हड़ताल से साफ सफाई प्रभावित, आनन्दनगर में लगा कचरे का अंबार

*कचरे के ढेर , सड़ांध और बदबू के बीच जीवन बसर करने को मजबूर हैं स्थानीय लोग*

*संक्रामक बीमारी फैलने का लोगों को सता रहा भय*

फरेंदा,महाराजगंज

जहां-तहां कूड़े कचरे का अंबार और सड़कों पर बेतरतीब ढंग से पसरी हुई गंदगी। नगर पंचायत आनंद नगर कि यह पहचान बन गई है। पंचायत कर्मी लगातार चौथे दिन से हड़ताल पर हैं। यही स्थिति बनी रही तो लोगों को खासा परेशानी उठाना पड़ेगा नगर के लोगों को संक्रामक बीमारी फैलने का भी भय सता रहा है।

आप लोगों को बता दें कि पिछले 6 महीने से नगर पंचायत आनंद नगर के अधिशासी अधिकारी के मनमानेपन रवैया के कारण पंचायत कर्मियों द्वारा यह तीसरी बार हड़ताल किया जा रहा है। नगर अध्यक्ष विजयलक्ष्मी जायसवाल की माने तो उनका कहना है की कर्मियों को हड़ताल के लिए अधिशासी अधिकारी द्वारा उकसाया जा रहा है। अधिशासी अधिकारी सहित नगर पंचायत के तीन कर्मियों का वेतन कार्य में लापरवाही बरतने के मामले में स्पष्टीकरण को लेकर बाधित की गई है। ऐसे में बिना स्पष्टीकरण दिए ही अधिशासी अधिकारी दबाव बनाकर पूरे कर्मियों के साथ अपना वेतन भी आहरण करना चाहती हैं जिसके लिए उन्होंने सफाई कर्मियों को मोहरा बनाया है। लाखों की लागत से बने डंपिंग यार्ड में कभी कूड़ा नहीं डंप किया गया। नगर में कराए गए कार्यों को श्रमदान घोषित करने की भी बात अधिशासी अधिकारी द्वारा की जाती है जबकि नगर पंचायत कार्यालय के सामने ही उक्त कार्य कराया जा रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि पिछले 6 महीने से आरोप प्रत्यारोप का यह खेल अधिशासी अधिकारी और नगर अध्यक्ष के बीच जारी है लेकिन कोई भी उच्च अधिकारी मामले का संज्ञान लेने की जहमत नहीं उठाई है। अधिशासी अधिकारी को नगर अध्यक्ष द्वारा रोजाना कोई ना कोई नोटिस दिया जाता है लेकिन अधिशासी अधिकारी उस नोटिस को नगर अध्यक्ष द्वारा भेजा गया प्रेम पत्र कहती हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसी कौन सी विडंबना है की सरकार की योजना व विकास कार्यों को पलीता लगा रही अधिशासी अधिकारी पर जिलाधिकारी सहित उच्च अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई करने से बचा जा रहा है। कुल मिलाकर अधिशासी अधिकारी और नगर अध्यक्ष के दो पाटों के बीच में नगर का विकास कार्य बाधित है और जनता इसका खामियाजा भुगतने को मजबूर है।

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