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संतकबीर नगर

भूगोल में पंचायत और समाज से जुड़कर शोध करने की विशेष जरुरत : प्रो. शर्मा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भूगोल शिक्षकों की भूमिका विषय पर केन्द्रित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न.


महू। किसी भी देश की परिस्थिति को समझने के लिए भूगोल की जानकारी होना आवश्यक है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन में भूगोल शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. भूगोल में हमें पंचायत और समाज से जुड़कर शोध और नवाचार करने की विशेष जरुरत है ताकि हम राष्ट्र निर्माण में सहायक हो सकें. उक्त बातें पूर्व अध्यक्ष, भूगोल विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर ने डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू और भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भूगोल शिक्षकों की भूमिका विषय पर केन्द्रित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि कही.
प्रो. एच. एस. शर्मा ने कहा कि नॉलेज इकोनॉमी इनोवेशन से जुड़ा है. बिना इनोवेशन के किसी भी विषय में समग्रता और व्यापकता नहीं आ सकती है. जो क्षेत्र अभी हाशिये पर पर उनमें अध्यापक और विद्यार्थियों को जोड़ना बाकी है क्योंकि जहाँ पर विद्यार्थी कक्षाओं में पढ़कर चले जाते हैं शिक्षकों से जुड़ नहीं पाते हैं वहां व्यवहारिक ज्ञान संभव नहीं हो पाता है. भूगोल शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण के लिए विद्यार्थियों से संवाद करना बहुत जरुरी है.
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू की कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने कहा कि किसी भी राष्ट्र में शिक्षक राष्ट्र निर्माण का वाहक होता है. भूगोल अनुभवजन्य विज्ञान से जुड़ा है, उसे विकसित करना समय की जरुरत है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सबसे छोटे को योग्य बनाने और जो योग्यतम हो उसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. भूगोल शिक्षक देश की भौगोलिक परिथितियों को अच्छे से विद्यार्थियों को समझाएं, यही राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य है.
वेब संगोष्ठी में बीज वक्ता के रूप बोलते हुए डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में पीआरसी के निदेशक कहा कि नीति निर्धारण के बाद राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. शिक्षा सभी को बिना भेदभाव के सुलभ, सामान और सुगम्य हो. इस नीति में समग्र और समानता पर विशेष जोर दिया गया है. शिक्षा मंहगी न हो इस पर भारतीय शिक्षा नीति में विशेष प्रयास किया गया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारत के जीवंत समाज को नॉलेज सोसाइटी बनाकर सुपर पॉवर बनाने का प्रयास किया गया है.
वेबिनार के उद्बोधन में वक्ता के रूप में बोलते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखण्ड के जियोइनफोर्मेटिक्स विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ए.सी. पांडेय ने कहा कि भारत की वर्तमान पीढ़ी युवा है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं के समग्र विकास पर केन्द्रित है. इस नीति में देशज भाषा पर विशेष जोर दिया गया है ताकि विद्यार्थी अपनी स्थानीय भाषा में शिक्षित हो सकें.
उद्बोधन को आगे बढ़ाते हुए जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली के भूगोल विभाग के एसोशियेट प्रोफ़ेसर ने कहा कि भूगोल विद्यार्थियों को हमें सैद्धांतिक पक्ष के साथ-साथ व्यवहारिक पक्ष की जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है ताकि देश की भौगोलिक परिस्थिति को समझकर राष्ट्र निर्माण में सहायक हो सकें.
प. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के भूगोल विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. सरला शर्मा ने कहा कि हमें भूगोल में शोध पर विशेष जोर देने की जरुरत है. भूगोल में नवाचार और शोध से विषय को विकसित किया जा सकता है. सुखद है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसमें विशेष बल दे रही है.
वेबिनार में प्रस्तावना एवं स्वागत वक्तव्य डॉ चन्द्रशेखर ने तथा संचालन डॉ मनोज कुमार गुप्ता ने किया. इस अवसर पर देश-विदेश के वरिष्ठ भूगोलविद एवं शोधार्थी आभासी मंच से जुड़े रहे.

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