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महापर्व छठ पर लोगों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर मांगी दुआएं सूर्यनारायण के अर्घ्य और नमस्कार के साथ चार दिवसीय छठ पूजा का हुआ समापन,

पानी में खड़ी होकर सूर्य को अर्घ्य देती व्रती महिलाएं

उमेश मद्देशिया
नौतनवा महराजगंज: लोक आस्था के पर्व पर छठी मइया के गीत गूंज रहे थे। गुरुवार को सूर्यादय के अर्घ्यदान शुरू हो गया। नौतनवा के अलग-अलग घाट किनारे बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच गए। सूर्य भगवाव के दर्शन के लिए सभी कतारों में खड़े हो गए। सभी को अब भगवान भास्कर के दर्शन का इंतजार है। घाटों के साथ घरों में भी लोग भगवान भास्कर का दर्शन कर अर्घ्य दिए। घाटों पर बड़ी संख्या में व्रती जुट गयी। नई सुबह के प्रतीक भगवान सूर्य की उपासना में हर कोई लीन दिख रहा था। अर्घ्य देने के बाद घाट या घर पर पारण कर श्रद्धालु व्रत पूर्ण करेंगे। यह पर्व सूर्यदेव की उपासना के लिए प्रसिद्ध है और मान्यता है कि छठी मैय्या सूर्यदेव की बहन हैं।
इसी दौरान मंगल गीतों की धुन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। घाटों के आसपास मेला लगा हुआ था। आस्था के इस नजारे को लोग कैमरे में कैद करते रहे। पारंपरिक छठ गीतों को गाते हुए महिलाएं चल रही थीं। आगे-आगे घर के लोग पूजन सामग्री सिर पर लेकर छठ घाट की ओर बढ़ते रहे, जिसे देखकर पूरा माहौल ही भक्ति में डूबा रहा।
छठ पर्व पर लोगों ने सूर्यादय को गाय के दूध और जल से अर्घ्य दिया। इसके साथ ही छठ का विशेष प्रसाद ठेकुआ और फल चढ़ाया। इस त्योहार के आखिरी दिन व्रत करने वाले पुरुष और महिलाओं के द्वारा उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया गया। नगर के शास्त्री नगर, भुंडी मुहल्ला, दोमोहान घाट विष्णुपुरी छ्ठ घाट, हिंदू धर्म गौशाला छठ घाटों पर सूर्योदय से पहले बांस की टोकरी में ठेकुआ, चावल के लड्डू और कुछ फल लिए गए। सूप में फल और पूजा का सामान सजाया गया। लोटे में जल एवं दूध भरकर उसी से सूर्यदेव को ऊषा अर्घ्य दिया गया। इसके साथ ही सूप की सामग्री के साथ भक्त छठी मैया की भी पूजा अर्चना किए। इसी के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन हो गया।

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