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नगर पंचायत अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी के विवाद को सभासद व कर्मचारियों ने दी हवा

आउटसोर्सिंग कर्मचारी व सफाई कर्मियों के धरने की आड़ में अध्यक्ष द्वारा मांगे जा रहे स्पष्टीकरण पर डाला जा रहा है पर्दा

फरेंदा/महराजगंज नगर पंचायत आनंद नगर के नए बोर्ड का गठन हुए अभी साल भर तो नहीं हुए हैं लेकिन यदि अधिशासी अधिकारी पूजा सिंह परिहार की माने तो अध्यक्ष सभासद और कर्मचारी के बीच का विवाद 6 माह से ज्यादा पुराना है जो अब वेतन बाधित, सस्पेंशन और धरने तक पहुंच गया है । जी हां नगर पंचायत अध्यक्ष आनंद नगर द्वारा 2 दिन पहले वरिष्ठ लिपि के वेद प्रकाश गुप्ता और टंकड़ लिपिक धीरेंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया गया जबकि कर्मचारियों का वेतन दो माह से सिग्नेचर के विवाद की वजह से बाधित है और इसका परिणाम यह हुआ की सफाई कर्मी और कर्मचारी नगर के पद प्रकाश व्यवस्था को ठप करते हुए सफाई और झाड़ू का काम पूरी तरह से बंद कर नगर पंचायत कार्यालय परिसर के भीतर धरने पर बैठ गए हैं।

सफाई कर्मियों के काम ठप कर धरने पर बैठने के संबंध में अधिशासी अधिकारी पूजा सिंह परिहार से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि कर्मचारियों का वेतन दो महीने से अध्यक्ष महोदय के सिग्नेचर ना होने की वजह से नहीं मिल पा रहा है मेरे और मेरे लिपिक द्वारा रोज वेतन की फाइल अध्यक्ष महोदय के पास सिग्नेचर के लिए दी जाती है लेकिन न जाने किन कारणों से अध्यक्ष महोदय सिग्नेचर नहीं करती हैं जबकि इस संबंध में अध्यक्ष विजयलक्ष्मी जायसवाल ने बताया की तीन कर्मचारी वरिष्ठ लिपिक वेद प्रकाश गुप्ता, टंकड लिपिक धीरेंद्र श्रीवास्तव और अधिशासी अधिकारी पूजा सिंह परिहार से कार्यालय के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं सहित अनियमितताओं के बारे में दर्जनों नोटिस देने के बावजूद किसी प्रकार का स्पष्टीकरण जवाब न मिल पाने के कारण इनका वेतन बाधित करने की संस्तुति दी गई है जबकि बाकी सभी कर्मचारी का वेतन निर्गत करने में हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन कर्मचारियों को बरगला कर धरने की आड़ में बिना स्पष्टीकरण जवाब दिए यह तीनों कर्मचारी भी अपना वेतन निर्गत कराना चाहते हैं जो संभव नहीं है जबकि अधिशासी अधिकारी का कहना है की सिगनेचर मिसमैच और किसी अन्य के द्वारा किए जाने के कारण फाइल पर सिग्नेचर नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है की 2 महीने पहले तक कर्मचारियों को वेतन कैसे मिल रहा था। मामला इतना बढ़ गया की अध्यक्ष ने दो दिन पहले अपने दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया जिस संबंध में अधिशासी अधिकारी ने बताया कि बिना नोटिस के हमारे कर्मचारियों को उपस्थिति रजिस्टर में सस्पेंशन की बात लिखकर सामने लाई गई है। आरोपो की झड़ी लगाते हुए अधिशासी अधिकारी ने कहा की अध्यक्ष महोदय से आज पहली बार हमारी मुलाकात हुई है मेरे पास उनका कोई संपर्क सूत्र नहीं है नगर के मुख्य चौराहाओं सहित नगर पंचायत कार्यालय में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे जिसमें वॉइस रिकॉर्डर लगा है जिसका एक्सेस अध्यक्ष महोदय के घर से संचालित होता है और कर्मचारियों की ऑडियो वीडियो वायरल की जाती है जबकि हमारे कर्मचारियों ने बताया कि यह कैमरा बिना टेंडर के लगाए गए हैं ऐसे में हमारी लाख प्रयासों के बाद कैमरे लगाने वाले संस्था का पता नहीं चल पाने के कारण पूरे नगर में लगाए गए कैमरे सहित नगर पंचायत कार्यालय के कैमरे तक को श्रमदान घोषित कर दिया गया है आगे आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा की अध्यक्ष की सबसे चहेते व्यक्ति कमलेश शर्मा जो नगर पंचायत के ठेकेदार भी रहे हैं द्वारा वित्तीय अनियमितता में आरसी जारी कर दी गई है। वही सफाई कर्मियों द्वारा दिए जा रहे धरने के संबंध में वार्ड सभासद प्रदीप पांडे मोनू और मनोज जायसवाल ने धरने को राजनीति से प्रेरित बताते हुए धरने को अधिशासी अधिकारी की मौन सहमति बताई है। उन्होंने कहा योगी सरकार और इस जिले के छह बार के सांसद वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के मंसूबों पर अधिशासी अधिकारी पानी फेरने का काम कर रही है विकास कार्यों में रोड़ा बनते हुए अधिशासी अधिकारी ने करोड़ों का टेंडर नहीं होने दिया ऐसे में यह कहने में मुझे जरा भी हिचक नहीं है की अधिशासी अधिकारी कहीं विपक्ष के एजेंट के रूप में तो नहीं काम कर रही। लोकसभा चुनाव के एन वक्त पर कर्मचारियों का धरना प्रदर्शन और सफाई न होना सीधे जनता से जुड़ा मुद्दा है जो लोकसभा परिणाम को भी प्रभावित कर सकता है। मजे की बात यह है कि बीते 2 महीने से गहराए हुए इस विवाद का संज्ञान लेते हुए जिले के उच्च अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई जो एक प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। देखना यह होगा की यह धरना और कितने दिन चलेगा और इसके पीछे अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी की आंख मिचोली के खेल का हस्र क्या होगा। कुल मिलाकर खामियांजा जनता को ही भुगतना है।

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