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राजनीति

राष्ट्रवादी राजनैतिक चेतना के वाहक थे बाबू जगजीवन राम डॉ रामदास जी आत्राम

बाबू जगजीवन राम के कृतित्व एवं दर्शन को आत्मसात करने की जरुरत: प्रो. एस.एन.सिंह

ब्राउस में बाबू जगजीवन राम की जयंती का आयोजन

महू (इंदौर)। बाबू जगजीवन राम राष्ट्र की राजनैतिक चेतना के अग्रवाहक रहे हैं। बाबू जगजीवन राम के राजनैतिक चिंतन में देश प्रेम एवं सामाजिक समरसता का भाव था। उनके समरस एवं समावेशी राजनैतिक चिंतन में सामाजिक न्याय सबसे ऊपर था। उन्होंने भारतीय संस्कृति को पल्लवित करने का प्रयास किया उनका मानना था कि भेदभाव पूर्ण समाज कभी उन्नति नहीं कर सकता है। हमें भेदभाव त्याग कर इंसानियत को बढ़ावा देना चाहिए। राष्ट्र चिंतन में उनका योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है। विश्वविद्यालय पीठ के माध्यम से निरंतर कार्यक्रम आयोजित कर उनके कार्यों को समाज तक विस्तारित कर रहा है। बाबू जी एक सफल नीति-नियामक एवं समाज निर्धारक थे। उक्त बातें डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रामदास जी. आत्राम ने बाबू जगजीवन राम पीठ द्वारा बाबूजी की जयंती के अवसर पर ‘राष्ट्र निर्माण में बाबू जगजीवनराम का राजनैतिक चिंतन’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर अध्यक्ष कही।

        मुख्य वक्ता के रूप में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया के राजनीति विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता प्रो. एस.एन. सिंह ने कहा कि बाबू जी का संसद में रहने का सबसे लम्बा कार्यकाल रहा है। इसी से उनकी कार्यकुशलता और सामाजिक एवं राजनैतिक प्रतिबद्धताओं को समझा जा सकता है। सामाजिक न्याय के पुरोधा बाबू जी को आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक रूप से पिछड़े समुदाय का ध्यान सदैव रहता था। खाद्यान संकट से आज हम उबर गए हैं, यह बाबू जी की सफल नीतियों का ही प्रभाव है। बाबू जगजीवन राम ने एक सफल समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ तथा एक कुशल जन प्रतिनिधि के रूप में योगदान दिया। बाबू जी द्वारा बनाये गए नियम एवं नीतियाँ जाति बंधनों से मुक्त समरस समाज की स्थापना करने वाले थे। बाबू जी भारतीयता के पोषक थे। उन्होंने भारतीय सनातन मूल्यों पल्लवित तथा पोषित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

ब्राउस की सामाजिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता प्रो. सुनील गोयल ने विशिष्ट उद्बोधन में कहा कि बाबू जी ने सामाजिक कार्यों प्रमुखता दी तथा समाज को ही अपनी कार्यशाला माना। भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में रहकर उन्होंने समाज में व्याप्त विसंगतियों एवं बुराइयों को खत्म करने प्रयास किया। कई सफल एवं अनुगामी नीतियों का निर्माण किया। देश में सांस्कृतिक-आर्थिक समानता एवं समरसता का भाव उनके कृतित्व में रहा है। सामाजिक न्याय तथा राष्ट्र कल्याण का समरस भाव लोगों में आत्मसात हो यही बाबू जी का प्रयास रहा है। विश्वविद्यालय उनके कार्य, योजनाओं तथा दर्शन को व्यापक फलक पर स्थापित करने के लिए प्रयत्नशील है।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एल.एस. सोलंकी ने कहा कि बाबू जगजीवन राम का समावेशी राजनैतिक चिंतन सदैव राष्ट्र एवं समाज को जोड़ने वाला था। बाबू जी को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े समुदाय का ध्यान सदैव रहता था तथा उनकी कार्यशैली में दिखाई देता रहा है। बाबू जगजीवन राम ने एक सफल समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ तथा एक कुशल जन प्रतिनिधि के रूप में योगदान दिया। उनके द्वारा बनाये गए नियम एवं नीतियाँ जाति बंधनों से मुक्त समरस समाज की स्थापना करने वाले थे।

बाबू जगजीवन राम पीठ के आचार्य प्रो. शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि बाबू जगजीवन राम सर्वधर्म समभाव के पुरोधा थे। उनके राजनीतिक व्यक्तित्व में आत्मसंयम, संगठनात्मक शक्ति, राष्ट्र नेतृत्व और स्वावलंबन जैसे गुण अन्तर्निहित थे। बाबू जगजीवन राम ने श्रम मंत्रालय में रहकर श्रम सांस्कृतिक रूप से महत्त्व दिया तथा देशज अस्मिता से जोड़ने का अथक प्रयास किया। बाबू जी का किसी जाति, धर्म, वर्ग, संप्रदाय से कोई दुराग्रह नहीं था। उनके चिंतन में समरसता एवं सामाजिक न्याय समाहित था। बाबू जी का मानना था कि आमजन के चिंतन के केंद्र में रहकर ही देश को विकसित तथा विश्वगुरु बनाया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन बाबू जगजीवन राम पीठ के शोध अधिकारी डॉ. रामशंकर ने तथा धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के डॉ. मनोज कुमार गुप्ता ने किया।

कार्यक्रम के प्रथम भाग में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रामदास जी.आत्राम प्रो शैलेंद्र मणि त्रिपाठी प्रो सुनील गोयल डाक्टर रामशंकर मनोज गुप्ता प्रदीप कुमार द्वारा जयंती के अवसर कार्यक्रम की शुरुआत बाबूजी के चित्र एवं तथागत बुद्ध के समक्ष पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। साथ ही बाबू जगजीवन राम पीठ, ब्राउस द्वारा ‘बाबू जगजीवन राम उत्कृष्ट शोध आलेख पुरस्कार’ प्रतियोगिता के पोस्टर का विमोचन किया. प्रतियोगिता हेतु मौलिक शोध आलेख आमंत्रित किये गए हैं। जिसका विषय ‘बाबू जगजीवन राम का समग्र चिंतन है। शोध पत्र/आलेख भेजने की अंतिम तिथि 15.04.2023 है। इस अवसर पर प्रो. डी.के.वर्मा, डॉ. मनीषा सक्सेना, डॉ. कौशलेन्द्र वर्मा, प्रदीप कुमार, डॉ. संगीता मसानी, शोध अधिकारी डॉ. मनोज कुमार गुप्ता,सहित देश के विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थी, शोधार्थी तथा कर्मचारी मौजूद रहे।

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